नूपुर की छनछन तुमसे है,
कांगन की खनखन तुमसे है,
तबले की हर ताल है तुमसे,
वीणा की हर धुन तुमसे है।।1।।
तारों की झिलमिल तुमसे है,
चंदा की चमचम तुमसे है,
नदियों का बलखना तुमसे,
सूरज की गर्मी तुमसे है ।।2।।
पुष्पों का खिलना तुमसे है,
पेड़ों का हिलाना तुमसे है,
कलियों का मुस्काना तुमसे,
मेरी यह कविता तुमसे है।।3।।
मेरा हंसाना भी तुमसे है,
मेरा जीना भी तुमसे है,
मेरे दिल धड़कन तुमसे,
मेरे मरना भी तुमसे है।।4।।
पानी की ठंडक तुमसे है,
गीतों की सरगम तुमसे है,
है वंसत का आना तुमसे,
ये सारा जग ही तुमसे है।।5।।
——————————कुमार आदित्य
