अपनी बात


जब भी जे़हन में आता है। उसे यथार्थ रूप देकर आपके सामने लाने का प्रयास कर रहा हूँ। न तो में कवि हूँ, न ही लेखक। इस विधा का अदना सा शिष्य हूँ। आप सबके प्यार की दरकार है, गर मिल जाए तो मेरी भावनाओं की सच्चा संप्रेषण होगा । आप मेरा साथ देने को तैयार हैं तो हाथ से हाथ मिलाओ, जिससे एक कारवां बन चले। हम चलें, आप चलें, सारा जहां चले।
आपका
कुमार आदित्‍य

7 comments on “अपनी बात

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