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Cover page: अपनी बात ‘काव्‍य संग्रह’ द्वारा कुमार आदित्‍य

Cover page: अपनी बात 'काव्‍य संग्रह' द्वारा कुमार आदित्‍य

अब आप मांगा सकते हैं अपनी बात ‘काव्य संग्रह’ घर बैठे
Genre: Poetry
Language: Hindi
Format: Paper Back
Publisher: Uttakarsh Prakashan (2012)
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Pages: 96
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शेरो-शायरी (2)

खूबसूरत पलों को सजोने की जिद है,

किसी को हद से ज्‍यादा पाने की जिद है,

वो बैठा है रुठकर हमसें न जाने क्‍यों,

फिर भी उसे से दिल लगाने की जिद है।।1।।

 

कुछ खेल निराले होते हैं,

हर रोज उजाले होते हैं,

अंधियारों से टकराते जो,

वो हिम्‍मतवाले होते हैं।।2।।

 

तूफान आने से पहले खमोशी होती है सुना है,

पर यहां तो तूफान भी आता है हलचलों के साथ।।3।।

 

न जाने क्यों खफा है नींद आँखों से,

लग रहा है कि सोया न हूँ कई रातों से।।4।।

शेरो-शायरी (1)

हम फटेहाल हीं सही लेकिन दिल तो अमीर है,

उनको है खुद पर गुमान ये उनका नसीब है।

 

यह नसीब भी न देगा जब मेरा साथ ये हमसफर,

तेरी दुआ के सहारे ही गुजर जाएगी जिंदगी अपनी।

 

ये बात और है वो कुछ कहे न कहे,

सुनता हूं रोज उसे इबादत की तरह।

वो है मेरा खुदा मुझको दुआ दे या न दे,

पूजा करुंगा उसकी मोहब्‍बत की तरह।

 

आग का दरिया है इश्‍क ये उन्‍हें बता ही दो,

खाक हो जाएंगे गर पास आकर करेंगे बात।

 

वो न समझे अभी तक मोहब्‍बत का मिज़ाज,

आंखों के समंदर में जो भी उतरा वो डूब गया।

———————————————कुमार आदित्‍य