मेरी उदासी का शबब दिल बन गया ऐसे,
अकेलेपन के सिवा कुछ भी दिखाई ही न दे।
तू इस तरह बसा गया है मेरी सांसों में,
तेरी आवाज के सिवा कुछ भी सुनाई ही न दे।
जिन्हें था ख्वाव समझा वो बने हैं बेडियां मेरी,
मुझे तकलीफ है ये उसको दिखाई ही न दे।
न कर मुझसे मुहब्बत मगर इतना तो बता,
जाऊं मैं किस गली कोई राह दिखाई ही न दे।
चंद रातों ने तड़पाया है मुझे हद से ज्यादा,
कौन सुनेगा ये दास्तां किसी को सुनाई ही न दे।
ये मेरे दोस्त मुझको जिंदगी की दुआ दे,
अब मुझे उसके सिवा कुछ भी सुझाई भी ने दे।
——————————————-कुमार आदित्य
