एक एहसास…

मानक

एक एहसास,

अनकहा सा,

अनसुना सा,

अनछुआ सा,

जैसे मन में

उठ रही हो

जल तंरग,

नदी के शांत जल में,

जैसे फेंका गया हो पत्‍थर,

मेरा काव्‍य,

मार रहा हो हिलोंरे,

चांद को देखकर,

समद में उठने वाले

ज्‍वार-भाटे की तरह,

शब्‍दों से परे,

निगुर्ण, नि:शब्‍द सा,

एक एहसास

बालों में रेंगती

उंगलियों सा,

चुबंन सा,

आलिंगन सा,

चेहरे पर छा रही,

घनघोर घटाओं सा,

बरसात के इंतजार सा,

एक एहसास,

अनकहा सा,

अनसुना सा।—–कुमार आदित्‍य

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