मिठास खो गई…..

मानक

time

 

 

 

 

 

 

ये जो दौर है उसके अपने कायदे
अपने कानून हैं,
हवाओं में बह रही हर बात,
शब्दश: सही होगी,
ये मुमकिन भी है, और नामुमकिन भी,
ये वक्त गहरी पड़ताल का है,
यहां बहुत सी दुकानें ऐसी हैं,
जिनकी उचाइयां तो बहुत हैं,
पर पकवान फीके ही मिलते हैं,
आजकल फीका जो पसंद करने लगे हैं,
मिठास का मज़ा अलग ही था,
पर कहीं खो गई मालूम पड़ती है।

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