तत्वामसि………

Kal Halki Halki Barish thi

जब, मैं और तुम,
एक ही हैं
फिर मेरे हराने,
या तुम्‍हारे जीतने से,
कोई फर्क नहीं पड़ता,
तुम्‍हारा हारना हुआ,
मेरा हारना हुआ,
और तुम्‍हारी जीत,
मेरी जीत होगी,
फिर ये होड़ कैसी है,
तेज दौड़ने की,
तुम्‍हें याद होगी न
बचपन की कहानी,
एक खरगोश था
और था एक कछुआ,
अगर दोनों साथ चलते,
तो लोग उनकी मिसाल देते,
पर एक हार गया,
और एक जीत गया,
हां एक बात और भी है,
इस कहानी की,
तेज चलने वाले,
जल्‍दी थक जाते हैं,
और जिन्‍हें तय करनी है,
लम्‍बी दूरी,
वो साधे और मजबूत,
कदम आगे बढ़ाते हैं,
हां विजेता भी वही होते हैं,
अब तय तुम्‍हें करना है,
विजेता बनाना है,
या थककर हार जाना है,
चयन तुम्‍हारा है,
पर एक बाद याद रखना,
मैं, तुम और हम दोनों,
एक ही हैं।——————————————-आदित्‍य शुक्‍ला

कभी कभी मन करता है…..

कभी कभी मन करता है,
समंदर किनारे तुम्‍हारे साथ,
निहारूं डूबते सूरज को,
गुजारूं तुम्‍हारे साथ,
लालिमा से भरी एक शाम,

फार्म हाऊस की सूनसान छत पर,
तेरे एहसास को जिऊं,
छुअन और आलिंगन की गवाह बने,
सितारें से भरी चांदनी रात,

सावन के बरसते बादलों मे,
तुम्‍हारे साथ भीगूं,
छप-छप करते हुए,
जियूं अपना बचपन,

कभी कभी मन करता है,
तेरा हाथ पकड़ कर करूं,
लम्‍बी दूरी तक यात्रा,
यूं ही गुजर जाए एक उम्र।————–आदित्‍य शुक्‍ला

कुमार आदित्‍य द्वारा कविता में प्रकाशित किया गया

मनभावन, सावन आयो रे…….

sawan

आयो रे आयो रे,

मनभावन, सावन आयो रे,
मनभावन, सावन आयो रे,

आयो रे आयो रे,

सखि गीत सु‍हावन गाओ रे,
मनभावन, सावन आयो रे,

कैसे गाऊं गीत सुहावन,
छोड़ गए हमका जब साजन,
अापन तो बस यही कहानी,
झर-झर आंख झरत है सावन,
मैं बिरहानी बिरह की मारी,
फिरत रहूं मैं मारी-मारी,
हो सूखो बीतो जाये सवनवा,
कैसे सुर लग जावे,

मन भावन सावन आयो रे,
सखि गीत सुहावन गाओ रे,

पिया हंसी मन ऐसे बासी,
कछु भी रास न आवे,
कौन देश जा बैठे सजनवा,
हो कोई संदेशा लावे,
लाख जतन कर हारी मैं तो,
रतियां नींद न आवे,
हो बैरी छुप-छुप नीर बहावे,
कैसे दिल बहलावे।

मन भावन सावन आयो रे,
सखि गीत सुहावन गाओ रे।

बागन-बागन मैं दुखियारी,
देखत हूं मैं राह तुहारी,
ताल के बरगद झूलन जाऊं,
तुम बिन कैसे पैंग बढ़ाऊं,
खो बैठी में सुध-बुध अपनी,
कछु भी रास न आवे,
हो साजन काहे मोह सतावे,
कौन काल तू आवे।

मन भावन सावन आयो रे,
सखि गीत सुहावन गाओ रे।

आयो रे आयो रे,

सखि गीत सु‍हावन गाओ रे,
मनभावन, सावन आयो रे।

मनभावन सावन आयो रे।——————आदित्‍य शुक्‍ला

कुमार आदित्‍य द्वारा गीत में प्रकाशित किया गया