एक एहसास…

एक एहसास, अनकहा सा, अनसुना सा, अनछुआ सा, जैसे मन में उठ रही हो जल तंरग, नदी के शांत जल में, जैसे फेंका गया हो पत्‍थर, मेरा काव्‍य, मार रहा हो हिलोंरे, चांद को देखकर, समद में उठने वाले ज्‍वार-भाटे की तरह, शब्‍दों से परे, निगुर्ण, नि:शब्‍द सा, एक एहसास बालों में रेंगती उंगलियों सा,…

है कोई तो बात है…

तू साथ है, तू पास है, ये तेरा एहसास है, जिस्‍म में मेरे चलती बस तेरी ही सांस है, हो रहा दिल पर असर, है कोई तो बात है… खिल रही है हर कली, गा रहे हैं ये भंवर, हर तरफ है छा रहा प्रेम का मंजर अमर, लग रहा है तू बसंत की सौगात है, है…