गाया प्यार का गीत दुबारा…

मानक

है वसंत का मौसम प्‍यारा, सूरज का बढ़ गया है पारा,

बारिश की टिप-टिप बूदों ने, गाया प्‍यार का गीत दुबारा।।1।।

पेड़ों से गिरते पत्‍तों ने,

पुष्‍पों की खिलती कलियों ने,

हर मन है अगन लगाई,

जैसे जागी हो तरूणाई,

इस मौसम का खेल निराला, मैं भी फिरता हूं मतवारा,

बारिश की टिप-टिप बूदों ने, गाया प्‍यार का गीत दुबारा।।2।।

जब ठंडक जाने को होती,

प्‍यारा मौसम आता है,

धरती की धानी चुनरी पर,

नभमंडल इतराता है,

फागुन के गीतों की धुन पर, बाजे मन का हर इकतारा,

बारिश की टिप-टिप बूदों ने, गाया प्‍यार का गीत दुबारा।।3।।

यह मौसम यादों का मौसम,

जब भी मिलने आता है,

हर दिल में होती है हलचल,

हर युवा मन गाता है,

कामदेव के रथ सवार हो, चंदा को मिल गया है तारा,

बारिश की टिप-टिप बूदों ने, गाया प्‍यार का गीत दुबारा।।4।।

चल चलें सजाएं प्रीत ज़रा,

खोजें अपना मनमीत ज़रा,

प्रेम हिलोर उठे जब दिल में,

गाएं फिर मल्‍हार ज़रा,

इस मौसम में इस जीवन को, प्रियतम का यूं मिले सहारा,

बारिश की टिप-टिप बूदों ने, गाया प्‍यार का गीत दुबारा।।5।।

है वसंत का मौसम प्‍यारा, सूरज का बढ़ गया है पारा,

बारिश की टिप-टिप बूदों ने, गाया प्‍यार का गीत दुबारा।।6।।

————————————————-कुमार आदित्‍य

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आखिर कब तक…

मानक

देखकर यूं भूख से मरते चमन को,

रो उठा है आज फिर से  दिल कोई।

धूं-धूं होकर जला रहा है घर किसी का,

मर रहा है भूख से फिर आज कोई।।1।।

रो रहा है फूल कोई पेट की इस आग में जल,

इस हृदय में चुभ रहा है शूल कोई।

मर रहे हैं अन्‍नदाता और नेता सो रहे हैं,

क्‍या हुई चुनने में हमसे भूल कोई।।2।।

सूखे मां के आचलों में फिर से भरना है उजाला,

लड़नी होगी फिर से हमको जंग कोई।

खोखली बातों से हरगिज न बनेगी बात अब,

लेना हमको आज होगा फिर नया संकल्‍प कोई।।3।।

चल चलें इस देश को फिर से सजाएं और संवारें,

भटके के लोगों को दिखाएं फिर अनोखी राह कोई।

कब तलक यूं ही चलेगा मौत का ये सिलसिला,

अब बनाना ही पड़ेगा फिर नया कानून कोई।।4।।

———————————————-कुमार आदित्‍य