तुम्‍हारी जरुरत

मानक

पतझड़ के साथ,
गिरते तेरी यादों के पत्‍तों,
मैं हर रोज लिखता हूं,
कुछ नया,
परंतु पीले होते इन पत्‍तों की,
हरितिमा को बचा नहीं पाता,
ये पत्‍तों कई दिनों से,
गिर रहे हैं लगातार,
तेरी यादों का पेड़,
बिना पत्‍तों के गंजा लगने लगा है,
एक दम सपाट गंजा,
अब तो तुमको आना ही होगा,
कुछ दिन यहां रहना,
इसकी देखभाल करना,
खाद-पानी देना,
जिससे नई कोपलों के साथ,
यादों का पेड़,
हो सके फिर से हरा-भरा,
लेकिन इस बार आना,
तो कभी वापस मत लौटना,
मैं देख नहीं सकता,
पर मेरी आंखों को हरियाली भाती है,
ठंडक पहुंचती है,
मेरे जे़हन में,
मेरी जिंदगी की हरितिमा को,
तुम्‍हारी जरुरत है।

(बिना आंखों के भी कभी-कभी……………………………….देखे जाते हैं निरुत्‍तर स्‍वप्‍न)

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